जै जै बुन्देलखण्ड दोस्तों! आज 20 मार्च 2020, शुक्रवार को हमारे नगर बरुआसागर, झाँसी की रानी की ग्रीष्म कालीन राजधानी में ताल के किनारे दूसरी मढ़िया पर हमारी अपनी संस्था 'बदलाओ : जन - जागरुकता के लानेँ' की पहली मीटिंग शाम 05 बजे सुनिश्चित की गई थी। लेकिन आँधी और बारिस की बजह से देर से मीटिंग सम्पन्न हुई। तेजस्व बदलाओ, कुशराज बदलाओ और नवीन पटैरिया समय पर पहुँच जाते हैं और फिर फोन से सम्पर्क साधते हैं और फिर सभी सदस्य आ जाते हैं। अब संस्थापक - महासचिव कुशराज मीटिंग की कार्यवाही शुरू करते हुए कहते हैं - "जै जै बुंदेलखंड दोस्तों! हम आप सभी का ध्यान नगर की प्रमुख समस्याओं पर केन्द्रित करना चाहते हैं। हमारे नगर की समस्याऐं प्लास्टिक - पॉलीथिन कचरे की सफाई न होना, सार्वजनिक स्थानों जैसे बाजार, मंसिल माता मंदिर पर शौचालय की व्यवस्था का न होना है और शिक्षा - स्वास्थ्य व्यवस्था का बदहाल होना है। इन समस्याओं के समाधान के लिए हम 'बदलाओ जन - जागरूकता आंदोलन' के तहत 'सफाई जागरूकता अभियान' शुरु करने जा रहे हैं। आप सब इस आंदोलन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लें और बदलाओ के लक्ष्य की ओर अग्रसर बनें। हम बदलेंगे, तुम बदलोगे, हम सब बदलेंगे तभी तो ये समाज और दुनिया बदलेगी।"
इसके बाद नवीन पटैरिया ने सभा को संबोधित करते हुए शिक्षा सुधार के मुद्दे को उठाया और शिक्षा सुधार के सुझाव दिए।
तत्पश्चात कुलदीप दुबे ने कुशराज के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि बदलाओ की पहल सराहनीय है। जनता कर्फ्यू / भारत बंद और कोरोना वायरस के प्रति जन - जागरुकता फैलाने का सुझाव दिया। और फिर आयुष दुबे ने अंग्रेजी की एक सुप्रसिद्ध कहावत "Believe in yourself anything is possible" का हवाला देते हुए कहा कि एक दिन सारी दुनिया में चहुओर बदलाओ ही बदलाओ गुँजेगा। अब अभी जरूरत है हम सबको साहस के साथ कड़ी मेहनत करने की। अब जगजीवन यादव ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए, कुशराज के दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति के अनुभवों के बारे बताते हुए कहा कि हमारे मित्र कुशराज को शासन - प्रशासन से काम कराने का अच्छा खासा अनुभव है इसलिए हम सब कुशराज के साथ खड़े हैं, हमेशा बदलाओ के साथ खड़े है। अंत में सभा को संस्थापक - अध्यक्ष तेजस्व ने सम्बोधन में संगठन 'बदलाओ : जन जागरूकता के लानें" के इतिहास के बारे में विचार साझा करते हुए कहा कि हमनें परममित्र कुशराज की छात्र राजनीति में छात्रों को अपना हक माँगने के लिए एक घोषणापत्र जारी किया गया था, जिसमें छात्र - छात्राओं की माँगों को इस बात का हवाला देते हुए उठाया गया है कि संविधान के भाग -3 अनुच्छेद (19-22) द्वारा प्रदत्त स्वतन्त्रता के अधिकार के तहत अपनी आवाज बुलन्द कर रहे हैं;
से प्रभावित होकर अपने क्षेत्र के छात्रों और नागरिकों को अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए इस संस्था की नींव डाली है। इन्होंने न साथियों का सहास बढ़ाते हुए कहा कि हम सब उस वीरभूमि बुन्देलखण्ड के युवा हैं, जहाँ की झाँसी की रानी ने सन् 1857 की क्रान्ति की ज्योति जलाई थी और अब हम समाज बदलाओ क्रान्ति की ज्योति जलाने जा रहें हैं। 'बदलाओ' हम सबकी अपनी संस्था है। हम सबको मिलकर ही इस संस्था के माध्यम से अपने आपमें, इस समाज में और सारी दुनिया में बदलाओ लाना है और अपने सपनों की दुनिया बसाना है।

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